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Lata Mangeshkar: बनारसी साड़ियों के जरिए जुड़ गया मां-बेटे का नाता, अरमान और रिजवान लता मंगेशकर को भेजते थे साड़ियां

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: गीतार्जुन गौतम Updated Sun, 06 Feb 2022 11:21 PM IST
लता मंगेशकर
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लता मंगेशकर का बनारस से कला और संस्कृति का नाता था। बनारसी साड़ियां तो लता जी की पहली पसंद हुआ करती थीं। गौरीगंज इलाके से ही लता मंगेशकर के लिए साड़ियां जाती थीं। साड़ी व्यवसायी अरमान व रिजवान ने बताया कि मंगेशकर परिवार से ऐसा खास रिश्ता बन गया कि हम लोग तो लता जी को मां ही कहते थे और वह हमें अपना बेटा मानती थीं।

अरमान ने बताया कि तीज-त्योहारों पर वह उन्हें व उनके परिवार के लोगों को कपड़े-उपहार भेजती रहती थीं। अभी उनके स्वास्थ्य के लिए अरमान ने 20 जनवरी को श्रीकाशी विश्वनाथ धाम में उनके नाम से बाबा का अभिषेक भी करवाया था। उनके निधन की खबर सुनकर पूरा परिवार शोकाकुल है, सुबह से ही लोगों का फोन उनके यहां आ रहे हैं। अरमान बताते हैं कि लता दीदी से उनका संपर्क वर्ष 2015 मई में हुआ था।
अरमान के साथ लता मंगेशकर।
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उनके व्यक्तिगत सहायक महेश राठौर उनके परिवार के अन्य सदस्यों और भाई हृदय मंगेशकर के साथ काशी यात्रा पर आए थे। तब लता दीदी के लिए साड़ियां खरीदने के लिए वह गौरीगंज स्थित उनकी दुकान पर पहुंचे। उसी समय उनकी पसंद जानने के लिए अरमान से मोबाइल फोन से लता दी से बात कराई।
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लता मंगेशकर
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बातचीत के क्रम में लता दीदी ने उन्हें साड़ियां लेकर मुंबई आने को कहा। एक माह बाद वह साड़ियां लेकर मुंबई स्थित उनके घर प्रभुकुंज अपार्टमेंट पहुंच गए। बताते हैं कि बातचीत के दौरान उन्हें लता दीदी के स्नेह में मां की छवि और सरलता नजर आई और भावावेश में उन्हें मां बोल दिया। फिर तो मां-बेटे का यह रिश्ता स्थायी बन गया। लगभग हर महीने और कभी-कभी हफ्ते में उनसे बात हो जाया करती थी, साल में तीन-चार बार मुंबई जाने पर उनसे मुलाकात कर आशीर्वाद लेना अरमान और रिजवान की दिनचर्या बन गई।
लता मंगेशकर
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अरमान बताते हैं कि लता मां से कई बार काशी चलने का आग्रह किया, वह भी चाहती थीं मगर अपने स्वास्थ्य को देखते हुए वह काशी न आ सकीं। बोलीं, व्हील चेयर पर बैठकर जाना उन्हें पसंद नहीं। एक जनवरी को आखिरी बार बातचीत हुई थी। कल जब मां के स्वास्थ्य का समाचार सुन महेश भाई को फोन लगाया तो उन्होंने बताया कि हां, वेंटिलेटर पर हैं लेकिन घबराने की कोई बात नहीं, सब ठीक है।
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लता मंगेशकर
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नहीं शामिल हो सके अंतिम संस्कार में
रविवार की सुबह सुर साम्राज्ञी के निधन का समाचार सुनते ही अरमान ने मुंबई जाने की तैयारी कर ली थी। व्यक्तिगत सहायक महेश राठौर से बात हुई तो उन्होंने कहा कि कोविड प्रोटोकाल के कारण बहुत की कम संख्या में लोगों के शामिल होने की योजना बनाई गई है। इसलिए आपके आने का कोई मतलब नहीं है। अरमान को मुंबई नहीं पहुंच पाने का अफसोस है।

चौक की पाठक साड़ी की दुकान से जाती थीं लता जी के लिए साड़ियां
कारोबारी नवीन पाठक ने बताया कि चौक पर उनकी बहुत पुरानी बनारसी साड़ियों की गद्दी थी। उनकी दुकान की साड़ियां लता जी को बेहद पसंद आती थीं। कोल्हापुर के साड़ी व्यवसायी लता जी के लिए विशेष रूप से यहां से साड़ियां मंगवाते थे। पिता जी कमल नारायण पाठक 1993 में जब कोल्हापुर गए थे तो उस दौरान दुकान पर लता जी भी आई थीं। उन्हें जब पता चला कि पिता जी बनारस से हैं और उनकी दुकान से ही वहां पर साड़ियां आती हैं तो उन्होंने बेहद प्यार और सम्मान दिया।
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