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जर्जर लाइनों का जंजाल... विभाग बना कंगाल

Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Fri, 18 Feb 2022 10:32 PM IST
A network of dilapidated lines... the department became a pauper
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हरदोई। जिले में बिजली व्यवस्था मजबूत हुई तो खपत भी बढ़ गई। खपत के लिहाज से विभाग को मुनाफा होना चाहिए] लेकिन हकीकत उम्मीदों से बहुत दूर है।

मुनाफा तो दूर दिन प्रतिदिन बढ़ने वाली खपत पर विभाग को औसतन हर माह करीब 11 करोड़ की चपत लग रही है। विभागीय आंकड़ों का औसत निकालने पर बात आइने की तरह साफ हो जाती है।
हर माह जिले में करीब 44 करोड़ रुपये की बिजली की खपत है, जिसके सापेक्ष बिलिंग सिर्फ 31 करोड़ रुपये के आसपास है। यह आंकड़े विभाग के लिए ही डरावने नहीं, बल्कि उपभोक्ताओं के लिए भी खतरे की घंटी बजाने वाले हैं।

लाइनलास के रूप में हो रहे इस घाटे से निपटने के लिए विभाग मूल्य वृद्धि को सबसे सहज तरीका मानता रहा, जबकि विभागीय लोग इससे अलग सोच रखते हैं।
उनका मानना है कि जब तक लाइनों के तार जर्जर रहेंगे या फिर पुराने तारों को समय से नहीं बदला जाएगा, तब तक न तो लाइनलास कम होगा और न ही लाइनलास के भीतर छिपे बिजली चोरी के दंश का उपचार हो सकेगा।
जिले में करीब सवा पांच लाख बिजली कनेक्शन हैं।
इन उपभोक्ताओं को सुचारु रूप से बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए कमोवेश नगरीय क्षेत्रों में 10 हजार की आबादी पर एक विद्युत उपकेंद्र तो ग्रामीण क्षेत्रों में औसतन 20 हजार की आबादी पर एक विद्युत उपकेंद्र स्थापित हो चुके हैं ।
जब कि 500 की आबादी पर बिजली की मांग के सापेक्ष ट्रांसफार्मर की पहुंच हो चुकी है। इस व्यवस्था को दुरुस्त बनाए रखने के लिए जिले में चार विद्युत वितरण खंड एवं इनकी मानीटरिंग एवं व्यवस्था के लिए एक अधीक्षण अभियंता कार्यालय स्थापित है।
इस भारी भरकम व्यवस्था के बीच शहर से लेकर गांवों तक बिजली की पहुंच बढ़ी है। बिजली की उपलब्धता से खपत भी लगातार बढ़ रही, लेकिन इसके बाद भी विभाग के लिए बिजली आपूर्ति घाटे का सौदा बनी है।
विभागीय सूत्रों का कहना है कि खपत के सापेक्ष बिलिंग न हो पाना सबसे बड़ी समस्या है, जिसमें ग्रामीण क्षेत्रों की जर्जर लाइनें लाइनलास बढ़ा रही हैं। इसके अलावा नगरीय क्षेत्रों में ओवरलोड होने से लाइनें क्षतिग्रस्त जल्दी होती हैं, जिससे लाइन लास औसतन 30 फीसदी के आसपास रहता है।
यह अलग बात है कि गर्मी के मौसम में लाइनलास 40 फीसदी तक पहुंचने के आंकड़े रह चुके हैं।
इसके पीछे गर्मी के मौसम में बिजली की खपत सामान्य दिनों की अपेक्षा दोगुनी होने के साथ लाइन फाल्ट ट्रांसफार्मर जलने सहित उपकेंद्रों में उपकरणों पर बढ़ने वाले लोड आदि से बड़े पैमाने पर बिजली बेकार जाती है।
इसके अलावा बिजली चोरी भी अहम समस्या है। अब बिजली चोरी नापने का कोई पैमाना नहीं होता, इसलिए उसे भी लाइनलास में ही गिना जाता है।
चोरी के मामले कम, घर-घर उजाला
लाइनलास में ही गिनी जाने वाली बिजली चोरी की बात करें, तो जिले में पिछले एक दशक में मामले काफी कम पड़े है। इसके पीछे कहीं न कहीं शासन द्वारा दी गई निशुल्क कनेक्शन योजना सहित विभाग द्वारा बड़े पैैमाने पर की गई छापा मार कार्यवाही है।
विभागीय आंकड़ों के अनुसार, एक दशक पहले तक जिले में बिजली कनेक्शनों की संख्या तीन लाख के आसपास थी। औसतन हर महीने सौ से अधिक मामले कटिया चोरी आदि के मिलते रहते थे।
अब बिजली कनेक्शनों की संख्या पांच लाख के पार पहुंच गई है और कटिया आदि के मामलों की संख्या औसतन 20 के आसपास रह गई थी। बढ़े कनेक्शनों से घरों में बिजली के उजाले पहुंच रहे हैं।
लाइनों की दिक्कतें थाम रही कनेक्शनों की रफ्तार
जिले में बिजली आपूर्ति की व्यवस्था काफी अच्छी होने के बाद भी अभी हर घर तक बिजली लाइन एवं कनेक्शन नहीं पहुंच पा रहे हैं। जिले में करीब आठ लाख राशन कार्डधारक परिवार है।
10 लाख से अधिक परिवारों के रहने का अनुमान है। ऐसे में विभागीय आंकड़ों में चल रहे करीब साढ़े पांच लाख कनेक्शनों की संख्या को देखे तो राशन कार्ड की संख्या के अनुसार भी करीब ढाई लाख घरों में बिजली की पहुंच नहीं है।
विभागीय लोग मानते हैं कि निशुल्क कनेक्शन योजना ने करीब ढाई लाख कनेक्शन बढ़ाए हैं, मगर बिजली लाइनों की दिक्कतों से बाधित होने वाली आपूर्ति से ग्रामीण क्षेत्रों में कनेक्शनों की रफ्तार तेज नहीं हो सकी है।
जिले में विद्युत वितरण खंड की व्यवस्था
विद्युत वितरण खंड प्रथम-बिलग्राम, मल्लावां, सांडी के नगरीय एवं ग्रामीण क्षेत्र, विद्युत वितरण खंड द्वितीय-हरदोई शहर व आस -पास के ग्रामीण क्षेत्र, विद्युत वितरण खंड तृतीय-शाहाबाद, सवायजपुर के नगरीय एवं ग्रामीण क्षेत्र, विद्युत वितरण खंड चतुर्थ-संडीला-नगरीय एवं ग्रामीण क्षेत्र।
साढ़े पांच लाख बिजली कनेक्शन
जिले की 1,306 ग्राम पंचायतों, सात पालिका क्षेत्रों और छह नगर पंचायत क्षेत्रों के लिए कुल करीब साढे़ पांच लाख बिजली कनेक्शन हैं।
इनमें नगरीय क्षेत्रों में करीब 80 हजार एवं ग्रामीण क्षेत्रों में करीब पौने पांच लाख बिजली कनेक्शन है हालांकि, नियमित रूप से संचालित होने वाले कनेक्शनों की संख्या करीब सवा पांच लाख है।
हजारों किलोमीटर चाहिए तार
विभागीय लोगों के अनुसार, जिलेभर में हर घर तक बिजली लाइनों की पहुंच बनाने के लिए हजारों किमी तार एवं पोल व ट्रांसफार्मरों की आवश्यकता है। अभी भी ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली कनेक्शनों के लिए हर गली मोहल्ले तक बिजली लाइनों की पहुंच नहीं हो पाई है।
कमोवेश हर गांव तक बिजली की लाइनें तो पहुंची हैं, मगर वोल्टेज गुणवत्ता एवं निर्बाध आपूर्ति के लिए अभी बडे़ पैमाने पर तार आदि संसाधनों की आवश्यकता है।
बोले अधिकारी
पिछले समय के मुुकाबले लाइनलास कम हुआ है, मगर लाइनलास अभी भी चिंता का विषय है। ज्यादातर लाइनें ठीक हो चुकी हैं और जो कमजोर हैं उनका चिन्हीकरण करने के साथ ही दुरुस्त कराने का कार्य किया जाता है।
लाइन सिस्टम को मजबूत करने के लिए तारों को बदलने की योजना के तहत जल्द ही जिले में कार्य शुरू होना है। जल्द ही लाइनों की व्यवस्था पहले से ज्यादा सुदृढ़ हो जाएगी, जिससे लाइन लास में कमी आएगी।
- ओपी पाल, एक्सईएन सदर

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