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                                                                           तुम अपने सामने की भीड़ से हो कर गुज़र जाओ
कि आगे वाले तो हरगिज़ न तुम को रास्ता देंगे 


कोई पूछेगा जिस दिन वाक़ई ये ज़िंदगी क्या है
ज़मीं से एक मुट्ठी ख़ाक ले कर हम उड़ा देंगे ...और पढ़ें
4 months ago
                                                                           छोड़ आया था मेज़ पर चाय
ये जुदाई का इस्तिआरा था
- तौक़ीर अब्बास


ज़रा सी चाय गिरी और दाग़ दाग़ वरक़
ये ज़िंदगी है कि अख़बार का तराशा है
- आमिर सुहैल...और पढ़ें
9 months ago
                                                                           मिरी गुड़िया तिरी रुख़्सत का दिन भी आ गया आख़िर
सिमट आया है आँखों में तेरा बीता हुआ बचपन
~सुहैल सानी...और पढ़ें
9 months ago
                                                                           अर्ज़ी दी तो निकली धूप
कोहरे ने ढक ली थी धूप
- सतपाल ख़याल 


धूप ऐसी तेज़ धूप गर्म है फ़ज़ा बहुत
मिलेंगे छाँव ढूँढ़ते बरहना-पा ख़ुदा बहुत
- नियाज़ हैदर ...और पढ़ें
9 months ago
                                                                           मुझे दुश्मन से भी ख़ुद्दारी की उम्मीद रहती है
किसी का भी हो सर क़दमों में सर अच्छा नहीं लगता 


ये नया शहर तो है ख़ूब बसाया तुम ने
क्यूँ पुराना हुआ वीरान ज़रा देख तो लो ...और पढ़ें
9 months ago
                                                                           यूँ तो हर शाम उमीदों में गुज़र जाती है
आज कुछ बात है जो शाम पे रोना आया


मुझे छोड़ दे मिरे हाल पर तिरा क्या भरोसा है चारा-गर
ये तिरी नवाज़िश-ए-मुख़्तसर मिरा दर्द और बढ़ा न दे ...और पढ़ें
9 months ago
                                                                           कौन कहता है कि मैं गरीब हूं
जब तक इस दुनिया में हमारे पापा रहेंगे
तब तक हम गरीब नहीं है ।
क्योंकि जब पापा किसी भी दुकान पर
अपने फटी हुई जेब में हाथ डालकर कहते हैं।
जो चाहिए हमारे बेटे को दो ।
भला ऐसे कोई कह स...और पढ़ें
9 months ago
                                                                           मैं तो समझा था कि लौट आते हैं जाने वाले
तू ने जा कर तो जुदाई मिरी क़िस्मत कर दी


तू ने यूँ देखा है जैसे कभी देखा ही न था
मैं तो दिल में तिरे क़दमों के निशाँ तक देखूँ ...और पढ़ें
9 months ago
                                                                           तेज़ हवा ने मुझ से पूछा
रेत पे क्या लिखते रहते हो 


अब तक मिरी यादों से मिटाए नहीं मिटता
भीगी हुई इक शाम का मंज़र तिरी आँखें ...और पढ़ें
9 months ago
                                                                           दुनिया ने तेरी याद से बेगाना कर दिया
तुझ से भी दिल-फ़रेब हैं ग़म रोज़गार के


इस तरह अपनी ख़ामुशी गूँजी
गोया हर सम्त से जवाब आए ...और पढ़ें
9 months ago
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